(1) इस धारा के प्रावधानों के अधीन, कोई भी सब्सक्राइबर अपना डिजिटल सिग्नेचर लगाकर एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को प्रमाणित कर सकता है।
(2) इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का प्रमाणीकरण (authentication) असिमेट्रिक क्रिप्टो सिस्टम (asymmetric crypto system) और हैश फंक्शन (hash function) के इस्तेमाल से किया जाएगा, जो शुरुआती इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को घेर कर उसे दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में बदल देता है।
स्पष्टीकरण.—इस उप-धारा के उद्देश्यों के लिए, —हैश फंक्शन (hash function) ‖ का मतलब है बिट्स के एक सीक्वेंस (sequence) का दूसरे में एल्गोरिथ्म मैपिंग (algorithm mapping) या ट्रांसलेशन (translation) , जो आम तौर पर छोटा होता है, जिसे —हैश रिजल्ट (hash result) ‖ के रूप में जाना जाता है, इस तरह कि एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हर बार एक ही हैश रिजल्ट (hash result) देता है जब एल्गोरिथ्म को उसी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के साथ इनपुट के रूप में चलाया जाता है, जिससे यह कंप्यूटेशनली (computationally) असंभव हो जाता है—
(a) एल्गोरिथ्म द्वारा निर्मित हैश रिजल्ट (hash result) से मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को प्राप्त करना या पुनर्निर्माण करना;
(b) कि दो इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड एल्गोरिथ्म का उपयोग करके एक ही हैश रिजल्ट (hash result) उत्पन्न कर सकते हैं।
(3) कोई भी व्यक्ति सब्सक्राइबर (subscriber) की पब्लिक की (public key) का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सत्यापित (verify) कर सकता है।
(4) प्राइवेट की (private key) और पब्लिक की (public key) सब्सक्राइबर (subscriber) के लिए अद्वितीय (unique) हैं और एक फंक्शनिंग की पेयर (functioning key pair) बनाती हैं।