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भारतीय दंड संहिता

(आईपीसी)

“जज” (Judge)।

अध्याय 2: सामान्य स्पष्टीकरण

धारा: 19


“जज” शब्द का मतलब सिर्फ वो इंसान नहीं है जिसे आधिकारिक तौर पर जज कहा जाता है, बल्कि हर वो इंसान भी है, —जिसे कानून ने ये अधिकार दिया है कि वो किसी भी कानूनी कार्यवाही, चाहे वो दीवानी हो या आपराधिक, में आखिरी फैसला दे, या ऐसा फैसला दे जिसके खिलाफ अपील न की जाए तो वो आखिरी माना जाएगा, या ऐसा फैसला दे जिसे अगर कोई और अधिकारी सही ठहरा दे तो वो आखिरी माना जाएगा, याजो लोगों के समूह में से एक है, और उस समूह को कानून ने ऐसा फैसला देने का अधिकार दिया है।उदाहरण
(a) एक कलेक्टर जो 1859 के एक्ट 10 के तहत किसी मामले में अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है, वो एक जज है।
(b) एक मजिस्ट्रेट जो किसी ऐसे आरोप पर अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है जिसमें उसके पास जुर्माना या कैद की सजा देने का अधिकार है, चाहे अपील हो या न हो, वो एक जज है।
(c) पंचायत का एक सदस्य जिसके पास मद्रास कोड के 21 रेगुलेशन VII, 1816 के तहत मामलों की सुनवाई और फैसला करने का अधिकार है, वो एक जज है।
(d) एक मजिस्ट्रेट जो किसी ऐसे आरोप पर अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है जिसमें उसके पास सिर्फ दूसरे कोर्ट में ट्रायल के लिए भेजने का अधिकार है, वो जज नहीं है।

The language translation of this legal text is generated by AI and for reference only; please consult the original English version for accuracy.

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