(1) मजिस्ट्रेट के सामने चल रहे सभी वारंट-मामलों में, प्रत्येक गवाह का सबूत, जैसे-जैसे उसकी जांच आगे बढ़ती है, लिखित रूप में या तो मजिस्ट्रेट स्वयं या खुले न्यायालय में उसके श्रुतलेख द्वारा या, जहाँ वह शारीरिक या अन्य अक्षमता के कारण ऐसा करने में असमर्थ है, उसकी दिशा और अधीक्षण के तहत, इस संबंध में उसके द्वारा नियुक्त न्यायालय के एक अधिकारी द्वारा लिखा जाएगा।[बशर्ते कि इस उप-धारा के तहत एक गवाह का सबूत ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी अपराध के आरोपी व्यक्ति के वकील की उपस्थिति में रिकॉर्ड किया जा सकता है।] [आपराधिक प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2008 (2009 का 5) , धारा 20 द्वारा डाला गया।] (2) जहां मजिस्ट्रेट सबूत लिखवाता है, वह एक प्रमाण पत्र रिकॉर्ड करेगा कि उप-धारा (1) में उल्लिखित कारणों से सबूत स्वयं द्वारा नहीं लिखा जा सका। (3) ऐसा सबूत आम तौर पर एक कथा के रूप में लिखा जाएगा; लेकिन मजिस्ट्रेट, अपने विवेक से, ऐसे सबूत के किसी भी भाग को प्रश्न और उत्तर के रूप में लिख सकता है, या लिखवा सकता है। (4) इस प्रकार लिखा गया सबूत मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा और रिकॉर्ड का हिस्सा होगा।
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